Sunday, September 2, 2007

तान्या

तान्या

है अधिकार मुझको भी जन्म लेने का,
अपनी कोंख में मुझको पनाह दे दो मां।
सृष्टि के रचयिता की इस अनुपम कृति की,
मैं भी बन सकूं साक्षी वो राह दे दो मां।।

पिता की थाम कर ऊंगला मैं चलना सीखूंगी,
बैठ बाबा के कांधे पर देखूंगी जहां सारा।
सजा कर भाई की सूनी कलाई रेशम के धागे से,
दादी मां की आंखों का बन जाऊं मैं तारा।।

रिश्तों के माधुर्य़ से पुलकित हो जो बगिया,
अपने मातृत्व की वही ठंडी छांव दे दो मा।।

हैं अरमान कुछ मेरे,सजाए स्वप्न नयनों ने,
मगर डर है कहीं ये ख्वाब न रह जाएं अधूरे।
जो लोग कहते हैं नहीं मैं वंश तेरी मां,
टिकी है मुझ पर अब उनकी विषभरी नजरें।।

बना लो अंश मुझको अपने कोंमल ह्दय का
अपनी तान्या को बस इतना अधिकार दे दो मां।।

4 comments:

  1. bahut khoob....!!

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  2. vakai apki lekhni mein sacchai hai. yeh kadwa sach hai unke liye jo dunia mein ane se pahle hi kisi masoon rachna ko nasht kar dete hain.

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  3. vakai tanya..agar nari chahe to dunia ki raah badal sakti hai.

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  4. bhai..itna accha kisne likha hain??

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