Wednesday, January 2, 2008

ये हैं संस्कृति के रक्षक


भागो आ गए संस्कृति के रक्षक। आपका सिर फोड़ेंगे, कपड़े फाड़ेंगे, हुड़दंग मचाएंगे और तोड़फोड़ करेंगे। होटलों में जबरन घुसना और मौका मिलते ही अपने हिस्से की दारू लेना इनका काम है। भई, संस्कृति के रक्षक हैं, तो इतना तो हक बनता है न इनका।

आपको याद होगा कि ऐसे ही कुछ संस्कृति के ठेकेदारों ने पिछले साल मुंबई में एक लड़की के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं। इस साल भी ऐसी ही घिनौनी हरकत दोहराई गई। इनसे भले तो वे बलात्कारी हैं जो संस्कृति को बचाने का दावा तो नहीं करते हैं। समाज सुधार के नाम पर अपनी मनमर्जी चलाना कहां की आजादी है। धर्म के नाम गुंडागर्दी चलाने वाले इन संस्कृति सुधारकों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इनकी ऐसी हरकतों की तुलना तो तालिबानियों से की जाए तो गलत नहीं होगा।

एक तरफ तो हम कहते हैं कि हमारा देश लोकतांत्रिक देश है और हर नागरिक को अपने फैसले लेने का हक है, तो फिर यह क्या था जो कल रात हुआ और पिछले साल भी हुआ था। क्या यह माना जाए कि लोकतंत्र इन तथाकथित संस्कृति के ठेकेदारों के इशारे पर चलता है। किसने इन्हे यह अधिकार दिया कि वे संस्कृति की रक्षा के नाम पर उसे नंगा करने का प्रयास करें।

देश के युवाऒं में इन्हें रोकने का माद्दा है और इस अन्याय के खिलाफ इन्हे ही आगे आना होगा। वरना ये ठेकेदार कब संस्कृति को तार-तार कर देंगे इसका पता भी नहीं चलेगा।

ग्राफिक्स : रवि लिहनकर

9 comments:

  1. बड़ी शर्मनाक घटना है इसकी जितनी निंदा की जावे कम है .पश्चात्य सभ्यता की खाल पहिनने वालो को इस तरह का ख़ामियाज़ा तो भुगतने पड़ेगे .

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  2. संस्कृति के इन रक्षकों के संरक्षक राजनैतिक दलों को सबक सिखाना शुरू कर दीजिए।

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  3. mujhe sharm aa rahi hai apmne ko mumbaikar kahne mein


    ashish maharishi

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  4. No doubt it is shame for mumbai. but I think these girls also some little responsible for this kind of attampt. at the midnight how could that girls roaming on the road like that. No it is not our culture. I am not trying to support or defend those crowd who done shamfull event. I am just trying to say that every one should take precautions. It is not our culture to roaming at mid night (Specialy girls).

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  5. बेनामीJanuary 2, 2008 at 9:42 PM

    bahut hi sharm ki baat hai..vaise mujhe anil phanse ji baat le itefaq nahi hai. ye desh hamara hai to fir ye log kaun hote hain jo ye batayein ki hamein kab ghar se nikalna chahiye aur kab nahi. aisi hi bhasha mumbai ke police commisoner bhi bol raha the. lagta hai ki wo bhool gaye hain ki unhe jo moti tankhwah milti hai jo janta ki kamai se unki rakhsa ke liye milti hai na ki netaon ki jee-huzuri karne kee.

    Namit Shukla

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  6. अब तक छिपे हुए थे उनके दांत और नाखून।
    संस्कृति की भट्ठी में कच्चा गोश्त रहे थे भून।
    छांट रहे थे अब तक बस वे बड़े-बड़े कनून।
    नहीं किसी कोदिखता था दूधिया वस्त्र पर खून।

    मायावी हैं, बड़े घाघ हैं, उन्हें न समझें मंद।
    तक्षक ने सिखलाए उनको सर्पनृत्य के छंद।
    अजी समझ लो उका अपना नेता था जयचंद।
    हिटलर के तंबू में अब वे लगा रहे पैबेद।

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  7. यह घटना निंदनीय है। न सिर्फ मुंबई में बल्कि भारत के कई शहरों में इस तरह की वारदात हुई हैं। हालांकि यह भी सही है कि ऐसी घटनाओं को रोकने में अकेले पुलिस की भूमिका काफी नहीं होगी। पर महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने इस बारे में सही कहा कि इस तरह की वारदात को अंजाम देने वालों के दिलों इतना भय तो होना चाहिए कि हम ऐसा करेंगे तो पुलिस पकड़ लेगी या हमें सजा हो सकती है या समाज में हमारा नाम खराब होगा। बहरहाल, मैं आपसे इतना जरूर कहना चाहूंगा कि आप पत्रकार हैं, इसलिए आप से ऐसी सपाट बयानी की उम्मीद नहीं की जा सकती। आपके लेख में कोई गहराई नहीं है। न कोई विश्लेशण हैं, न कोई रिसर्च। बेहतर होता कुछ वैचारिक पुट ही होता। आपको हतोत्साहित करने का मेरा कोई इरादा नहीं है, मैं तो सिर्फ इतना कहना चाहता हूं जब भी आपकी कलम चले कुछ अलग हटकर लिखे।

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  8. अनिल जी, यदि कोई बात हमारी संस्कृति में ना हो तो उसे करने वाले को सबसे नजदीकी खंबे से फाँसी पर लटका देना चाहिये ना ? वैसे देश के जितने पुरुष व स्त्रियाँ पैन्ट्स आदि पहनें, बिजली का प्रयोग करें, गैस पर खाना बनाएँ आदि आदि, उनके साथ इसी तरक का व्यवहार होना चाहिये ना ?

    सीता जी को रावण द्वारा उठा ले जाना भी सही था क्योंकि वे वन में अकेली क्या कर रही थीं ?

    हमें, चाहे हम स्त्री हों या पुरुष, अपने आप पर लज्जित होना चाहिये। इन लड़कों पुरुषों को ऐसे संस्कार हम माता पिता व समाज ने ही दिये हैं ।
    घुघूती बासूती

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  9. बेनामीJanuary 4, 2008 at 3:02 AM

    Mired Mirage ji aap yah to ullekh kariye ki apne kin anil ko address kiya hai...kyonki is comment par ladkiyon ko doshi batane wale Anil Fanse ji hain aur jinhone is poori ghatna ki ninda apne shabdo se kee hai wo Anil Pandey ji hain.

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