Sunday, September 29, 2013

जैसी जनता वैसी व्यवस्था और सरकार

देश के किसी भी कोने में चले जाइए, किसी भी पान की दुकान पर या शाम को बाजार या मोहल्लों में होने वाली पटियेबाजी पर। आपको देश की राजनीति और देश की दुर्दशा पर टिप्पणी करते विशेषज्ञ जरूर मिल जाएंगे। घोटालों से लेकर सियासी दांवपेच के बारे में उनका विश्लेषण सुनने लायक होता है। सभी यह मानते हैं कि हमारा देश भ्रष्टाचार और गंदी राजनीति का शिकार है। लेकिन क्या सारा दोष नेताओं पर मढना जायज है। जरा सोचिए।

नेता मंगल ग्रह से तो आए नहीं हैं जो हम पर राज कर रहे हैं। हमारे और आपके बीच में से ही चुनकर भेजे गए है। हम ही उनको भेजते हैं और फिर कोसते हैं। व्यवस्था पर दोष भी मढते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में चुनाव में नकारने का अधिकार देने की बात कही है। इससे पहले दोषियों को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने का आदेश भी दिया था, जिसके खिलाफ केंद्र सरकार ने अध्यादेश पारित कर दिया था।

हम यानि आम जनता का मानस यह है कि तंत्र की बेकार है, उसे सुधारना होगा। इस तरह जिम्मेदारी टालने से बात नहीं बनने वाली है। व्यवस्था को सुधारना हमारे हाथों में ही है। इसके लिए सरकार या सुप्रीम कोर्ट का मुंह ताकने की कतई जरूरत नहीं पडे अगर थोडी समझदारी से काम लिया जाए। मसलन, आपको चुनावों में कोई पसंद नहीं है तो राइट टू रिजेक्ट के अलावा वोट न डालने का निर्णय भी तो कानून में दिया गया है। बस आपको पोल बूथ जाकर यह बताना होगा कि आपको किसी को भी वोट नहीं देना है।

इसी तरह से अगर आप अपने जनप्रतिनिधि से संतुष्ट नहीं हैं तो उसका सामाजिक बहिष्कार शुरू करिए, क्योंकि जनता ही उनकी ताकत है और जनता ही उनकी कमजोरी भी है।

लेकिन इससे भी जरूरी है खुद को बदलना। खुद सोचिए कि ईमानदार व्यवस्था की चाह रखने वाले आप और हम खुद कितने ईमानदार हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसे काम होते हैं जहां आप भ्रष्टाचार को बढावा देते हैं। चाहे वो सामान की खरीदारी हो या फिर​ किसी सरकारी दफ्तर से काम करवाना।

अगर लाइसेंस बनवाना हो तो एजेंट खोजते हैं। कोई सर्टिफिकेट बनवाना हो तो जुगाड निकालते हैं। जान पहचान के दम पर काम करवाना मानो शान की बात समझा जाता है। कोई नेता से पहचान का रौब दिखाता है तो कोई सरकारी अधिकारी का। पुलिस वालों से दोस्ती का भी इस्तेमाल किया जाता है। ट्रैफिक पुलिस पकड ले तो तुरंत जेब से फोन निकालकर किसी से बात करवाने लगते है। सडक पर रेड लाइट हो तब भी उसे क्रॉस करना मानो शान की बात है।

अगर हम अपना सिविक सेंस सुधारेंगे तो व्यवस्था भी सुधरने लगेगी और नेता भी लाइन पर आ जाएंगे। आखिर व्यवस्था हमारे लिए हैं, तो उसे बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी ही तो है।

जैसी जनता वैसी व्यवस्था और सरकार

देश के किसी भी कोने में चले जाइए, किसी भी पान की दुकान पर या शाम को बाजार या मोहल्लों में होने वाली पटियेबाजी पर। आपको देश की राजनीति और देश की दुर्दशा पर टिप्पणी करते विशेषज्ञ जरूर मिल जाएंगे। घोटालों से लेकर सियासी दांवपेच के बारे में उनका विश्लेषण सुनने लायक होता है। सभी यह मानते हैं कि हमारा देश भ्रष्टाचार और गंदी राजनीति का शिकार है। लेकिन क्या सारा दोष नेताओं पर मढना जायज है। जरा सोचिए।

नेता मंगल ग्रह से तो आए नहीं हैं जो हम पर राज कर रहे हैं। हमारे और आपके बीच में से ही चुनकर भेजे गए है। हम ही उनको भेजते हैं और फिर कोसते हैं। व्यवस्था पर दोष भी मढते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में चुनाव में नकारने का अधिकार देने की बात कही है। इससे पहले दोषियों को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने का आदेश भी दिया था, जिसके खिलाफ केंद्र सरकार ने अध्यादेश पारित कर दिया था।

हम यानि आम जनता का मानस यह है कि तंत्र की बेकार है, उसे सुधारना होगा। इस तरह जिम्मेदारी टालने से बात नहीं बनने वाली है। व्यवस्था को सुधारना हमारे हाथों में ही है। इसके लिए सरकार या सुप्रीम कोर्ट का मुंह ताकने की कतई जरूरत नहीं पडे अगर थोडी समझदारी से काम लिया जाए। मसलन, आपको चुनावों में कोई पसंद नहीं है तो राइट टू रिजेक्ट के अलावा वोट न डालने का निर्णय भी तो कानून में दिया गया है। बस आपको पोल बूथ जाकर यह बताना होगा कि आपको किसी को भी वोट नहीं देना है।

इसी तरह से अगर आप अपने जनप्रतिनिधि से संतुष्ट नहीं हैं तो उसका सामाजिक बहिष्कार शुरू करिए, क्योंकि जनता ही उनकी ताकत है और जनता ही उनकी कमजोरी भी है।

लेकिन इससे भी जरूरी है खुद को बदलना। खुद सोचिए कि ईमानदार व्यवस्था की चाह रखने वाले आप और हम खुद कितने ईमानदार हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसे काम होते हैं जहां आप भ्रष्टाचार को बढावा देते हैं। चाहे वो सामान की खरीदारी हो या फिर​ किसी सरकारी दफ्तर से काम करवाना।

अगर लाइसेंस बनवाना हो तो एजेंट खोजते हैं। कोई सर्टिफिकेट बनवाना हो तो जुगाड निकालते हैं। जान पहचान के दम पर काम करवाना मानो शान की बात समझा जाता है। कोई नेता से पहचान का रौब दिखाता है तो कोई सरकारी अधिकारी का। पुलिस वालों से दोस्ती का भी इस्तेमाल किया जाता है। ट्रैफिक पुलिस पकड ले तो तुरंत जेब से फोन निकालकर किसी से बात करवाने लगते है। सडक पर रेड लाइट हो तब भी उसे क्रॉस करना मानो शान की बात है।

अगर हम अपना सिविक सेंस सुधारेंगे तो व्यवस्था भी सुधरने लगेगी और नेता भी लाइन पर आ जाएंगे। आखिर व्यवस्था हमारे लिए हैं, तो उसे बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी ही तो है।

Wednesday, July 17, 2013

एक कलम और किताब दुनिया को बदल सकते हैं

संयुक्त राष्ट्र महासभा में मलाला युसुफजई द्वारा दिए गए भाषण का ​अनुवाद

मैं सबसे पहले उस सर्वशक्तिमान, दयालु और परोपकारी खुदा का नाम लेती हूं।

सम्माननीय संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्रीमान बान की मून,
महासभा के आदरणीय अध्यक्ष वुक जेरेमिक,
संयुक्त राष्ट्र वैश्विक शिक्षा के एनवॉय सम्मानीय गॉर्डन ब्राउन,
सभी वरिष्ठ सम्मानीय एवं मेरे प्यारे भाइयो और बहनो

आज, काफी लंबे अंतराल के बाद मुझे कुछ बोलने का मौका मिला है। इतने सम्माननीय लोगों के बीच आना मेरे लिए गौरव की बात है और यह क्षण मेरे जीवन के यादगार पलों में हमेशा रहेगा।

मैं नहीं समझ पा रही हूं कि अपनी बात को कहां से शुरू करूं। मैं यह भी नहीं जानती हूं कि लोग मुझसे क्या सुनने की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन मैं सबसे पहले उस सर्वशक्तिमान ईश्वर का धन्यवाद देना चाहती हूं, जिसके लिए हम सभी एक समान हैं और फिर उन सभी का आत्मीय आभार, जिन्होंने मेरे जीवन के लिए प्रार्थनाएं की हैं। मेरे प्रति लोगों का जो स्नेह है मैं उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं। मुझे दुनियाभर से शुभकामना संदेशों से भरे काड्र्स और तोहफे मिले हैं। इसके लिए मैं एक बार फिर सभी का शुक्रिया करती हूं। मैं उन बच्चों की भी आभारी हूं, जिनके अबोध शब्दों ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। मैं उन सभी वरिष्ठों को भी धन्यवाद देना चाहती हूं, जिनकी दुआओं ने मुझे शक्ति दी।

मैं उन सभी नर्स, डॉक्टर्स ,पाकिस्तान और ब्रिटेन के अस्पताल तथा यूएई की सरकार का भी शुक्रिया करती हूं, जिनकी मदद और इलाज की बदौलत मैं ठीक हो सकी हूं। मैं संयुक्त राष्ट्र संघ के ग्लोबल एजुकेशन फस्र्ट इनिशिएटिव कार्यक्रम को चलाने के फैसले पर महासचिव बान की मून और एनवॉय गॉर्डन ब्राउन का पूरी तरह समर्थन करती हूं। साथ ही मैं उनके नेतृत्व के लिए उन्हें धन्यवाद देती हूं। मुझे उम्मीद है कि वे हमेशा हम सभी को इसी तरह से काम करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

प्यारे भाइयो और बहनो, हमेशा एक बात याद रखिएगा कि मलाला-डे मेरा दिन नहीं है। यह उन सभी महिलाओं और बच्चों का दिन है, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई है। आज दुनियाभर में न जाने कितने मानवाधिकार संगठन हैं, जो शांति, समानता और शिक्षा के अधिकार के लिए काम कर रहे हैं। दुनिया में हजारों लोग हर साल आतंकी घटनाओं में मारे जाते हैं और लाखों घायल होते हैं। मैं भी उन्हीं में से एक हूं।

इसलिए मैं यहां खड़ी हूं...उन कई लड़कियों में से एक।

मैं अपने लिए नहीं, सभी लड़के और लड़कियों के बोल रही हूं।

मैंने अपनी आवाज शोर मचाने के लिए नहीं उठाई है, बल्कि मैं उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं, जिनकी बातें अनसुनी रह जाती हैं।

जो अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं :
उन्हें शांति से जीने का अधिकार मिले
समाज में समानता और सम्मान मिले
बराबरी का हक और दर्जा मिले
और शिक्षा का अधिकार मिले।

प्यारे दोस्तो, नौ अक्टूबर 2012 को तालिबान ने मेरे माथे के बाईं ओर गोली मारी थी। उसने मेरी दोस्त पर भी गोली चलाई थी। उसे लगा था कि उसकी गोलियों से हमारी आवाजें खामोश हो जाएंगी। लेकिन वो नाकाम रहे। इसके बाद उस खामोशी के बीच से हजारों आवाजें सामने आईं। आतंकवादी सोचते थे कि उनकी इस हरकत से मैं अपने लक्ष्य से भटक जाऊंगी, लेकिन मेरे जीवन से वे केवल कमजोरी, डर और निराशा को ही मार सके। उनकी इस कायराना हरकत के बाद मेरे अंदर दृढ़ता और ऊर्जा का जन्म हुआ। मैं आज भी वही मलाला हूं, आज भी मेरा वही लक्ष्य है, जो हमले के पहले था और आज भी मैं उतनी ही आशावान हूं। अब भी मैं अपने सपने को पूरा करने के लिए उतनी ही हिम्मत के साथ काम कर रही हूं।

प्यारे भाइयो और बहनो, मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं। न ही मैं, यहां तालिबान या किसी अन्य आतंकी गुट से अपनी निजी दुश्मनी या बदले का जिक्र करने आई हूं। मैं यहां हर बच्चे के लिए शिक्षा के अधिकार पर बात करने आई हूं। मैं चाहती हूं कि शिक्षा का अधिकार दुनिया में सभी के लिए हो। तालिबान और चरमपंथियों के बच्चों को तो खासतौर पर शिक्षा दी जानी चाहिए।

मुझे उस तालिबान से कोई घृणा नहीं है, जिसने मुझे गोली मारी थी। अगर वह मेरे सामने हो और मेरे हाथों में बंदूक हो, तब भी मैं उसे गोली नहीं मारूंगी। मैंने पैगम्बर मोहम्मद सा. से दयाभाव सीखा है और यही ज्ञान मुझे ईसा मसीह और भगवान बुद्ध को पढ़कर भी मिला है।

मार्टिन लूथर किंग, नेलसन मंडेला और मुहम्मद अली जिन्ना से भी मुझे इसी परंपरा की सीख मिली है। महात्मा गांधी, बचा खान और मदर टेरेसा के भी यही सिद्धांत थे। मैंने अपने माता-पिता से भी क्षमा करना ही सीखा है। मेरी आत्मा भी मुझसे यही कहती है कि सभी के लिए दिल में स्नेह रखो और अमन पसंद रहो।

प्यारी बहनो और भाइयो, जब हम अंधेरे में होते हैं तभी हमें प्रकाश का महत्व समझ में आता है। जब चारों ओर खामोशी और सन्नाटा हो, तभी आवाज की अहमियत समझ आती है। इसी तरह जब हम पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र स्वात में थे और हर रोज बंदूक और धमाके सुनते थे, तभी हमें यह अहसास हुआ कि किताब और कलम कितनी जरूरी हैं।

एक कहावत है कि 'कलम के आगे तलवार भी नहीं टिक सकती है', यह वाकई सच है। आतंकी मेरी कलम और किताबों से खौफजदा थे। तालीम की ताकत से वो खौफ में थे। यहां तक कि वे एक औरत से डर गए थे। एक औरत की आवाज उन्हें डरा रही थी। यही वजह है कि हाल ही में क्वेटा में आतंकियों ने 14 निर्दोष मेडिकल स्टूडेंट्स को मौत के घाट उतार दिया। इसी कारण उन्होंने मेरी कई महिला टीचर्स और खैबर पख्तूनवा व फाटा में काम करने वाले पोलियो कार्यकर्ताओं की भी हत्या की है। वे रोज किसी न किसी स्कूल को धमाके से उड़ा रहे हैं। इसकी वजह समाज में आ रहे बदलाव और समानता है।

सम्मानीय महासचिव महोदय, शिक्षा के लिए अमन का होना बहुत जरूरी है। दुनिया के कई हिस्सों, खासकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवाद के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। हम इस तरह की लड़ाई से ऊब चुके हैं। दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं और बच्चे परेशान और साधनहीन हैं। भारत में बच्चों को बालश्रम में लगाया जाता है। नाइजीरिया में कई स्कूल तबाह हो चुके हैं। अफगानिस्तान में दशकों से लोग चरमपंथ का शिकार हैं। छोटी बच्चियों को बालश्रम और घरेलू कामकाज में जोत दिया जाता है और कम उम्र में भी उनकी शादी भी कर दी जाती है। ऐसे देशों में महिला और पुरुष दोनों को ही गरीबी, अज्ञानता, अन्याय, नस्लीय भेदभाव, मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा जाता है।

प्यारे साथियो, मेरा ध्यान महिलाओं के अधिकार और लड़कियों की शिक्षा पर है, क्योंकि वे ही सर्वाधिक पीडि़त होती हैं। एक समय था जब महिला सामाजिक कार्यकर्ता अपने अधिकारों के लिए पुरुषों का साथ चाहती थीं, लेकिन अब हम यही काम अपने बूते पर कर रही हैं। मेरा कहने का यह कतई मतलब नहीं है कि पुरुषों को महिलाओं के अधिकारों के लिए बात नहीं करना चाहिए। बल्कि मेरा आशय यह है कि महिलाओं को अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए आत्मनिर्भर होने की जरूरत है।

प्यारे भाइयो और बहनो, अब वक्त आ गया है कि हम अपनी आवाज बुलंद करें। आज हम, दुनिया के सभी नेतृत्वों का आह्वान करते हैं कि वे अपनी नीतियों को शांति और समृद्धि के अनुकूल बनाएं। हमारी दुनिया के सभी नेताओं से अपील है कि वे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मूल अधिकारों में शामिल करें। जो कदम महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध हो उसे अस्वीकार किया जाना चाहिए। दुनिया की सभी सरकारों से हमारी अपील है कि वे हर बच्चे के लिए शिक्षा को अनिवार्य करें। उनसे हमारी यह भी अपील है कि आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ लड़ें और बच्चों के साथ क्रूरता को बंद किया जाए। सभी विकसित देशों से उम्मीद है कि वे लड़कियों के लिए शैक्षणिक अवसरों का विस्तार करेंगे।

सभी समुदायों से हम कहना चाहते हैं कि वे जाति, धर्म, क्षेत्र और लिंगभेद के आधार पर अलगाव और असमानता को समाप्त करने के लिए कदम उठाएं। अगर हम में से आधे लोग पीछे रह जाएंगे तो हम कभी आगे नहीं बढ़ सकेंगे। मैं दुनिया में अपनी सभी बहनों से कहना चाहूंगी कि वे बहादुर बनें और क्षमताओं को पहचानें।

प्यारे भाइयो और बहनो, हमें दुनिया के हर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा और स्कूल की जरूरत है। जब तक कि सभी के लिए शिक्षा की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक हमारा यह सफर पूरा नहीं हो सकता है। हमें कोई नहीं रोक सकता है। हम अपने अधिकार के लिए आवाज उठाते रहेंगे और इसके बूते बदलाव लाकर भी रहेंगे। इसके लिए हमें अपने शब्दों की ताकत पर विश्वास रखना होगा। इसी से दुनिया बदलेगी। शिक्षा के लिए हम सभी एक हैं और एक साथ हैं। अगर हम लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं तो हमें अपने आप को ज्ञान के हथियार और एकता की ढाल से लैस करना होगा।

प्यारे भाइयो और बहनो, हमें यह भी याद रखना होगा कि दुनिया में लाखों लोग गरीबी, अन्याय और अनभिज्ञता के शिकार हैं। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि लाखों बच्चे आज भी स्कूल से बाहर हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे भाई और बहन आज भी उज्ज्वल और शांतिपूर्ण भविष्य का इंतजार कर रहे हैं।

आइए, हम सभी अशिक्षा, गरीबी और आतंकवाद के खिलाफ कलम और किताब उठाएं, क्योंकि यही वो हथियार हैं, जिनके जरिए हम इन तीनों से लड़ सकते हैं।

एक बच्चा, एक शिक्षक, एक कलम और किताब दुनिया को बदल सकते हैं।

शिक्षा ही एकमात्र हल है। एजुकेशन फर्स्ट

Friday, May 17, 2013

हेलीकॉप्टर डील : खेल के खिलाड़ी


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इटली से हुए 3600 करोड़ रुपए के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में 362 करोड़ रुपए की दलाली  के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह संसद में हर मुद्दे पर बहस कराने को तैयार हैं। गौरतलब है कि इटली की अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद में रिश्वतखोरी के मुद्दे को विपक्ष संसद के सत्र में जोरशोर से उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर रक्षा मंत्री एके एंटनी भी विपक्ष के तीखे सवालों का जवाब देने के लिए पूरा होमवर्क करने में जुटे हैं। वहीं एके एंटनी पर मुख्य आरोप यह है कि इटली में हेलीकॉप्टर कंपनी के प्रमुख के गिरफ्तार होने के बाद सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

3,546 करोड़ रुपए के हेलीकॉप्टर सौदे में दलाली का मामला उजागर होने के बाद इस रक्षा खरीद समझौते की जांच में पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी का नाम आया है। इस घोटाले के तार दुनिया के कई देशों तक पहुंच रहे हैं। दलाली के इस पूरे खेल में शामिल प्रमुख खिलाडिय़ों पर एक नजर:

गियुसिपी ओरसी : फिनमैकेनिका कंपनी का सीईओ और चेयरमैन था इसे इटली में गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि उसने 12 अगस्त को वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की डील हासिल करने के लिए बिचौलियों की मदद ली और इसके लिए उनको 51 मिलियन यूरो (करीब 350 करोड़ रुपए) दिए।

गुइडो राल्फ हाशके : भारत में दलाली पहुंचाने के मामले में मुख्य सूत्रधार है। इस मामले में पिछले साल गिरफ्तार हुआ था। हाशके के पास स्विट्जरलैंड के अलावा अमेरिका की भी नागरिकता है। भारतीय रक्षा बिजनेस सर्किल में उसकी जबरदस्त पकड़ है। वह निर्बाध रूप से भारत आता रहता था और यहां के रक्षा सेक्टर की कार्यशैली से भलीभांति वाकिफ है। सेबी रिकॉर्ड के अनुसार वह 2009 तक एमजीएफ एमार के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में भी शामिल था।

कार्लो गेरोसा : हाशके का बिजनेस पार्टनर है। हेलीकॉप्टर डील के बारे में हाशके और पार्टनर कार्लो गेरोसा की बातचीत को गुप्त तरीके से रिकॉर्ड किया गया है।

क्रिस्टीन माइकल : ब्रिटेन का नागरिक है। भारत में शक्तिशाली राजनीतिक संपर्क हैं। कई बड़े नेताओं तक पहुंच। पिता वोल्फगांग रिचर्ड मैक्स माइकल के भी जबरदस्त भारतीय संपर्क हैं। माइकल, गियुसिपी ओरसी का विश्वासपात्र है। फिनमैकेनिका ने उसको 31 मिलियन यूरो की दलाली पहुंचाने का जिम्मा सौंपा। उसने रकम को इटली के राजनीतिज्ञों और यूरोप में अन्य लोगों तक पहुंचाया। स्विट्जरलैंड में जारी गिरफ्तारी वारंट से बचने के लिए दुबई में है।

गौतम खेतान : दिल्ली का वकील है और हाशके का बिजनेस पार्टनर है। हाशके और गेरोसा का कानूनी सलाहकार है। वह और हाशके चंडीगढ़ स्थित फर्म ऐरोमेट्रिक्स के प्रमोटर हैं। हाशके और गेरोसा की बातचीत में इसका नाम बार-बार आया है।

त्यागी बंधु : संजीव (जूली), डोक्सा और संदीप त्यागी पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी के करीबी रिश्तेदार हैं। पेशे से बिजनेसमैन हैं। नई दिल्ली के बाहरी इलाके में इनका फार्म हाउस है। पूर्व वायु सेना प्रमुख से हाशके की मुलाकात इन्हीं लोगों ने कराई।

एसपी त्यागी : 2005-07 के दौरान वायुसेना प्रमुख रहे। हाशके ने कहा है कि एडब्ल्यू 101 हेलीकॉप्टर के तकनीकी पहलुओं पर उसने त्यागी से विस्तृत बातचीत की थी। उसी आधार पर अगस्ता वेस्टलैंड ने एक तकनीकी रूप से मजबूत बेहतरीन दस्तावेज तैयार किया। जो कि होड़ में मौजूद प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर था। त्यागी ने उस दस्तावेज का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद अगस्ता वेस्टलैंड को वापस देते हुए कहा कि इसको आधिकारिक रूप से भारतीय वायु सेना के पास भेज दो। त्यागी ने माना है कि उनकी बिचौलिए हाशके से मुलाकात हुई थी, लेकिन भ्रष्टाचार के किसी भी मामले का उन्होंने खंडन किया है।

दलाली
हाशके ने इटली अधिकारियों के सामने स्वीकार किया है कि उसने एसपी त्यागी से छह-सात बार मुलाकात की थी। उस दौरान उसने हेलीकॉप्टर के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत की थी।
  • नवंबर, 2012 में अपने बयान में उसने स्वीकार किया है कि दलाली के रूप में उसको सौदे का 3.5 प्रतिशत यानी 20 मिलियन यूरो (144 करोड़ रुपए) मिले थे।
  • इसका 60 प्रतिशत यानी करीब 12 मिलियन यूरो उसने त्यागी बंधुओं को पहुंचा दिया।
  • बाकी बचे आठ मिलियन यूरो हाशके और कार्लो गेरोसा ने आपस में बांट लिए।
  • किसी भी जांच एजेंसी की निगाह से बचने के लिए भारत में वह रकम सॉफ्टवेयर निर्यात के फर्जी इंजीनियरिंग कॉन्ट्रेक्ट के जरिए ट्यूनीशिया के रास्ते भारत पहुंचाई गई।
लेन-देन में शामिल लोग
  • क्रिस्टीन
  • हाशके
  • हाशके कार्लो
  • त्यागी बंधु
समझौता

  • प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति समेत वीवीआईपी लोगों के इस्तेमाल के लिए फरवरी, 2010 में 12 अगस्त को वेस्टलैंड 101 हेलीकॉप्टर का समझौता सरकार और इटली की दिग्गज रक्षा कंपनी फिनमैकेनिका के बीच हुआ था।
  • फिनमैकेनिका की ब्रिटेन स्थित सहयोगी हेलीकॉप्टर निर्माता कंपनी का नाम अगस्त को वेस्टलैंड है। इस कंपनी पर भारत में सौदा हथियाने के लिए दलाली देने का आरोप है।

रक्षा घोटाले जिनसे हिली दुनिया..
रूस, चीन, इजरायल, इटली, फ्रांस जैसे हथियार बनाने वाले प्रमुख देशों के साथ-साथ दुनिया के दो तिहाई देशों में रक्षा सौदे में दलाली और भ्रष्टाचार आम बात है। बड़े रक्षा सौदों के ठेके हासिल करने के लिए रिश्वतखोरी का सहारा लेना कंपनियों की आदत-सी बन गई है। पूरी दुनिया में इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो चुके हैं, जिनमें कुछ में से कुछ में तो आरोपी पर कार्रवाई भी हुई। पिछले कुछ सालों में दुनिया के विभिन्न देशों में हुए रक्षा घोटाले और उसमें हुई कार्रवाई पर डालते हैं एक नजर :
  1. रूस ने रक्षा मंत्री को हटाया : वैसे तो रक्षा घोटाले में अधिकारियों पर कार्रवाई आम बात मानी जाती है, लेकिन रूस में तो घोटाले में रक्षा मंत्री को ही अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। दुनिया के प्रमुख हथियार डीलर वाले देशों में शुमार रूस में कुछ महीने पहले राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल नवंबर में रक्षा मंत्री अनातोली सेरद्युकोव को विभाग में 95 मिलियन डॉलर के घोटाले के आरोप में पद से हटा दिया था। उन पर आरोप था कि रक्षा मंत्रालय की संपत्तियों को तीन अरब रूबल के घाटे में उन्होंने एक व्यावसायिक फर्म को बेचा। इस कदम से पुतिन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि रक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  2. कनाडा में लड़ाकू विमान का घोटाला : हाल में अमेरिका से एफ-35 लड़ाकू विमानों की खरीद पर कनाडा में खूब हंगामा मचा। अप्रैल 2012 में कनाडा के ऑडिटर जनरल ने भी खरीद पर सवाल खड़े किए। इस रक्षा सौदे को देश के आर्थिक हितों के खिलाफ बताया गया। कनाडा के मीडिया की सुर्खियों में रहे इस सौदे को पूरी तरह से गलत करार दिया गया।
  3. फ्रांस का पनडुब्बी घोटाला : पनडुब्बी और लड़ाकू जहाज बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी डीएनएसएस और मलेशिया सरकार के बीच दो स्कॉर्पियन पनडुब्बी को लेकर समझौता हुआ। लेकिन समझौते पर उंगली उठने के बाद 2010 में फ्रांस सरकार ने मामले की जांच का आदेश दिया। बाद में खुलासा हुआ कि इस सौदे में मलेशिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री के दोस्त की कंपनी ने भूमिका निभाई और उसने फ्रांस और मलेशिया के कई अधिकारियों को रिश्वत दी।
  4. ताइवान का युद्धपोत घोटाला : फ्रांस की कंपनी थेल्स और ताइवान के बीच युद्धपोत के लिए समझौता हुआ। इस सौदे को लेकर आरोप लगा कि थेल्स ने इस ठेके को हासिल करने के लिए पांच लाख डॉलर से ज्यादा की रिश्वत दोनों देशों के अधिकारियों को दी, जबकि ये युद्धपोत ताइवान की जरूरतों के लिए भी फिट नही बैठते थे। बाद में जब जांच शुरू हुई तो सौदों में शामिल रहे आठ अधिकारियों की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। जांच के दौरान स्विस बैंक के 60 खातों में जमा साढ़े सात करोड़ डॉलर से ज्याद की रकम को सीज कर लिया गया। जून 2007 में इस रकम में से 34 लाख डॉलर की रकम स्विस बैंक ने ताइवान को लौटा दी, जबकि फ्रांस की अदालत ने थेल्स कंपनी पर जून 2011 में छह करोड़ तीस लाख यूरो का जुर्माना लगाया।
  5. श्रीलंका में घोटाला : श्रीलंका के पूर्व सेनाध्यक्ष सरत फोंसेका को हथियार सौदे में भ्रष्टाचार को लेकर कोर्ट मार्शल किया गया, जिसमें उन्हें तीन साल की सजा की सिफारिश की गई। इसके साथ ही उनका दर्जा, पेंशन और पदक वापस लेने के आदेश दिए गए थे। फोंसेका पर आरोप था कि सेनाध्यक्ष रहते हुए हथियार सौदों में अपने दामाद कंपनी का उन्होंने पक्ष लिया था।
  6. इराक में रक्षा सौदा घोटाला : इराक और रूस के बीच अक्टूबर 2009 में 4.2 अरब डॉलर से अधिक का हथियार सप्लाई का सौदा हुआ था। लेकिन इस सौदे को लेकर मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के बेटे तथा कुछ सांसद इस डील के पीछे थे और इसमें उन्होंने रिश्वत भी ली। इसकी जांच जारी है।

अरबों रुपए के घोटाले
यूपीए सरकार में लगातार सामने आ रहे घोटाले उसके लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। इनकी वजह से देश की साख को भी बट्टा लगा है। टूजी घोटाला हो या सीडब्ल्यूजी घोटाला या फिर कोयला घोटाला, सभी का आंकड़ा लाख करोड़ तक पहुंच जाता है। विपक्ष का आरोप है कि संप्रग सरकार के यदि सभी घोटालों को मिला लिया जाए किसी संपन्न देश के सालाना बजट से ज्यादा के तो यहां घोटाले ही हुए हैं।

2जी घोटाला संप्रग सरकार के पहले कार्यकाल में ही हुआ था, लेकिन वह सामने आया दूसरे कार्यकाल में। किसानों की कर्ज माफी योजना में घोटाला तो नजर भी आने लगा है। संप्रग सरकार की बदनामी का कारण बनने वाले कुछ प्रमुख घोटाले इस प्रकार हैं :
  • 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला : 2008 में जारी कैग की रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन टेलीकॉम मंत्री ए राजा के मनमाने रवैये और नीतियों के चलते 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से देश को 1.76 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। बोली प्रक्रिया की जगह पहले आओ पहले पाओ नीति पर अमल किया गया। यह घोटाला 1.76 लाख करोड़ रुपए का निकला।
  • राष्ट्रमंडल खेल घोटाला : 2010 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान कई प्रोजेक्टों में धांधली पाई गई। निविदाओं से लेकर मनमाने तरीके से ऊंचे दामों पर सामानों को खरीदा गया। कई ऐसी कंपनियों को भुगतान किया गया जो अस्तित्व में ही नहीं थीं। यह घोटाला करीब 70 हजार करोड़ रुपए का है।
  • कोयला घोटाला : 2009-2012 के बीच सरकार द्वारा निजी कंपनियों को आवेदन के आधार पर कोयले के 57 ब्लॉक आवंटित करने से इन कंपनियों को लाभ हुआ। बोली की प्रक्रिया से खजाने को नुकसान नहीं होता। कैग ने इस घोटाले में 1.86 लाख करोड़ रुपए के नुकसान का आकलन किया है।
बिजनेस का अनिवार्य हिस्सा है रिश्वत : बर्लुस्कोनी
इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिलवियो बर्लुस्कोनी ने रिश्वत मामले में जेल में बंद फिनमेकानिका एसपीए के पूर्व मुखिया ग्यूसेप ओर्सी का बचाव करते हुए गुरुवार को कहा है कि रिश्वत दुनिया भर में कारोबार का अनिवार्य हिस्सा है। भारत व इटली के बीच वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले पर बर्लुस्कोनी के इस बयान से विवाद पैदा हो गया है।

तीन बार इटली के प्रधानमंत्री रहे बलरुस्कोनी ने एक टेलीविजन को दिए अपने साक्षात्कार के दौरान कहा, रिश्वत सच्चाई है जो मौजूद है और इस तरह की अनिवार्य हालात से इनकार करने का कोई मतलब नहीं है। बर्लुस्कोनी ने कहा कि यह कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि हम उस देश में किसी को कमीशन के भुगतान के बारे में बात कर रहे हैं क्योंकि उस देश में इस तरह के नियम हैं।

Wednesday, May 15, 2013

The IM Story


आतंकवाद के साप ने एक बार फिर भारत पर अपना जहर उगला है और हैदराबाद को दूसरी बार इसका शिकार बनाया है। हैदराबाद में हुए आतंकी धमाके की सुगबुगाहट कुछ महीने पहले से ही दिखने लगी थी। दरअसल, मुंबई और पुणे धमाकों में शामिल इंडियन मुजाहिदीन के तीन संदिग्ध आतंकी मुंबई के आसपास पिछले दो साल से भेष बदलकर घूम रहे थे। एटीएस के मुताबिक ये आतंकी बड़ी आतंकी योजना को अंजाम देने की फिराक में थे। एटीएस ने संदिग्ध आतंकियों की तस्वीरें जारी कर खबर देने वाले को 10 लाख रुपए इनाम देने का एलान भी किया था।

महाराष्ट्र एटीएस ने मुताबिक चारों मुंबई, पुणे के गुनहगार हैं और अब ये महाराष्ट्र में फिर कोई बड़ी आतंकवादी घटना को अंजाम देने का प्लान बना रहे हैं। यासीन भटकल उर्फ अहमद उर्फ जर्रार उर्फ सिद्धीबाबा उर्फ इमरान उर्फ शाहरुख, तहसीन उर्फ वसीम उर्फ मोनू उर्फ हसन, असदुल्लाह उर्फ जावेद उर्फ हड्डी उर्फ तबरेज उर्फ शाकिर उर्फ दानियाल और वकस उर्फ अहमद। महाराष्ट्र एटीएस के मुताबिक इन चारों ने 13 जुलाई 2011 को मुंबई और एक अगस्त 2012 को पुणे में हुए सीरियल बम धमाकों को अंजाम दिया। एटीएस के मुताबिक यासीन भटकल जो कि इंडियन मुजाहिदीन का मोस्ट वांटेड आतंकी है वो मुंबई और पुणे के अलावा कई और धमाकों में वांटेड है। बाकी तीनों भी न सिर्फ धमाकों की साजिश में शामिल थे बल्कि ये सभी धमाकों के प्लांटर्स भी हैं, यानि इन्होंने उन धमाकों को अंजाम देने के लिए बमों को उनकी जगहों पर रखा था।

महाराष्ट्र एटीएस के मुताबिक इनमें से तीन यासीन भटकल, तहसीन और असदुल्लाह पिछले दो सालों से मुंबई और उसके आसपास रह रहे हैं। उन्हें फिलहाल वकस उर्फ अहमद के बारे में ज्यादा पुख्ता जानकारी नहीं है। उसके मुताबिक शायद वो देश से बाहर निकल गया है। एटीएस की मानें तो ये सभी भेष बदलने में माहिर हैं और पिछले 2 साल से ये सभी मुंबई के आसपास कभी छात्र बनकर हॉस्टल में रह रहे हैं। कभी आईटी कंपनी के कर्मचारी बनकर रह रहे हैं तो कभी कॉल सेंटर के कर्मचारी बनकर रह रहे हैं। एटीएस कई बार इनके करीब पहुंची लेकिन ये इतने शातिर हैं कि इन्होंने एटीएस के पहुंचने से पहले ही अपना ठिकाना बार-बार बदल लिया। आखिरकार दो साल की तलाश में नाकाम रहने के बाद अब एटीएस ने इन्हें पकडऩे के लिए इनकी तस्वीर जारी की है। साथ ही इनके बारे में खबर देने वाले को 10 लाख रुपए के इनाम का भी एलान किया है।

आतंकियों के नापाक मंसूबों को रोकने के लिए एंटी टेरर सेल यानी एटीसी की नजर हॉस्टल और कॉल सेंटरों पर खास तौर से है। यही नहीं एटीएस ने देश के सभी पुलिस थानों और खुफिया विभागों को भी इन आतंकियो की तस्वीरें भेज दी हैं। एटीएस की सबसे बडी उम्मीद अब लोगों से हैं क्योंकि आंतकियों के चेहरे से छात्र का नकाब हटाने में आम आदमी ही अहम भूमिका निभा सकता है।

एक नजर डालते हैं दहशतगर्दों की हालिया करतूतों पर :

  • दिल्ली, सात सितंबर 2011 : सुबह दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नंबर पांच के बाहर बम धमाका। नौ की मौत और 50 घायल।
  • मुंबई, 13 जुलाई, 2011 : शाम को हुए तीन बम धमाके से 17 की मौत और 131 लोग घायल।
  • दिल्ली, 19 सितंबर, 2010 : मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात बंदूकधारियों ने दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों से पहले जामा मस्जिद के बाहर विदेशी पर्यटकों की एक बस को निशाना बनाया और दो ताईवानी नागरिकों को घायल कर दिया।
  • बेंगलुरू, अप्रैल 17,2010 : बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुए दो बम धमाकों में 15 लोग घायल।
  • पुणे, फरवरी 10, 2010 : पुणे में जर्मन बेकरी में हुए धमाके में पांच महिलाओं और कुछ विदेशियों समेत नौ लोग मारे गए और 45 घायल हुए।
मुंबई हमले
  • मुंबई, नवंबर 26-29, 2008 : मुंबई के तीन स्थानों: ताज होटल, ओबेरॉय होटल और विक्टोरिया टर्मिनस पर हुए हमले तीन दिन तक चले और इनमें लगभग 170 लोग मारे गए और 200 अन्य घायल हो गए।
  • असम, अक्टूबर 30, 2008 : असम में एक साथ 18 जगहों पर हुए बम धमाकों में 70 से अधिक लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल हो गए।
  • इम्फाल, अक्टूबर 21, 2008 : मणिपुर पुलिस कमांडो परिसर पर हुए हमले में 17 लोग मारे गए
  • मालेगांव, सितंबर 29, 2008 : महाराष्ट्र के मालेगांव में एक वाहन में बम धमाके के कारण पांच लोगों की मौत।
  • मोडासा, सितंबर 29, 2008 : गुजरात के मोडासा में एक मस्जिद के पास हुए धमाके में एक व्यक्ति की जान चली गई।
दिल्ली में धमाका
  • दिल्ली, सितंबर 27, 2008 : दिल्ली में महरौली के बाजार में फेंके गए एक देसी बम के कारण तीन लोग मारे गए।
  • दिल्ली, सितंबर 13, 2008 : दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर हुए बम धमाकों में कम के कम 26 लोग मारे गए और अनेक घायल हुए।
  • अहमदाबाद, जुलाई 26, 2008 : दो घंटे के भीतर 20 बम विस्फोट होने से 50 से अधिक लोग मारे गए।
  • जयपुर, मई 13, 2008 : शहर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 68 लोग मारे गए और अनेक घायल हुए।
  • रामपुर, जनवरी 1, 2008 : उत्तर प्रदेश के रामपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कैंप पर हुए हमले में आठ लोगों की मौत।
  • लखनऊ, फैजाबाद, वाराणसी, नवंबर 23, 2007 : उत्तर प्रदेश के तीन शहरों में हुए धमाकों में 13 मारे गए कई घायल हुए।
  • अजमेर, अक्टूबर 11, 2007 : राजस्थान के अजमेर शरीफ में हुए धमाके में दो मारे गए।
हैदराबाद में धमाके
  • हैदराबाद, अगस्त 25, 2007 : आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुए धमाके में 35 लोगों की जान गई।
  • हैदराबाद, मई 18, 2007 : जयदराबाद में मक्का मस्जिद धमाके में 13 लोग मारे गए।
  • समझौता एक्सप्रेस, फरवरी 19, 2007 : भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में हरियाणा में धमाके, 66 यात्री मारे गए।
  • मालेगांव, सितंबर 8, 2006 : महाराष्ट्र के मालेगांव में तीन धमाकों में 32 लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल हुए।
  • मुंबई, जुलाई 11, 2006 : मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 170 लोग मारे गए और 200 घायल हो गए।
ब्लास्ट के बाद किसने क्या कहा?
प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने बम धमाकों को 'कायराना हमला' करार दिया है तो बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसकी गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। वहीं, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की काबिलियत पर ही सवाल उठा दिया है।

हमले बर्दाश्त नहीं
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि इस तरह की कायरतापूर्ण हरकतें शांति और सौहाद्र्र में खलल डालने वाली हैं। ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। हम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं।

कायराना हमला
पीएमओ की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने बम विस्फोटों की कड़ी निंदा की है। साथ ही लोगों से धैर्य और शांति बनाए रखने की अपील की है।

गंभीरता से हो जांच
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने विस्फोट में शिकार हुए लोगों के लिए दुख प्रकट करते हुए ईश्वर से मृतकों के परिजनों को इस गम से लडऩे की शक्ति प्रदान करने की कामना की। उन्होंने सरकार से इस मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की।

दुख का सामना करने की जरूरत
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि यह वाकई में बेहद ही निंदनीय काम है। इस घटना पर मुझे गहरा दुख है। भगवान इस घटना में मारे गए लोगों की आत्मा को शांति दें और उनके घर वालों को इससे लडऩे की शक्ति प्रदान करें। देशवासियों को इस समय संगठित होकर इस दुख का सामना करने की जरूरत है।

काबिलियत पर सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की काबिलियत पर ही सवाल उठा दिया है। उन्होंने कहा है कि जब गृह मंत्री का प्रमोशन उनकी कार्यक्षमता के बजाए वफादारी पर हुआ है तो ऐसे में उनसे क्या अपेक्षा की जा सकती है?

चार दिन पहले काटे थे सीसीटीवी के तार
दिलसुख नगर में लगे सीसीटीवी कैमरों के तार चार दिन पहले ही काट दिए गए थे। जबकि इससे पहले बताया जा रहा था कि उस इलाके के सीसीटीवी कैमरे खराब थे। आतंकी हमले की सूचना और एलर्ट के बाद भी हैदराबाद में सुरक्षा लचर रही, इस खुलासे से पुलिस की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

ऐसे दिया गया हैदराबाद ब्लास्ट को अंजाम!

पुणे माड्यूल तर्ज पर ब्लास्ट
सूत्रों के मुताबिक लश्कर ने इस प्लानिंग का पूरा खाका यासीन भटकल और उसके साथियों को भी समझा दिया था। धमाकों का शक इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल पर है, क्योंकि ये हैदराबाद के धमाके पुणे के धमाकों से पूरी तरह मेल खा रहे हैं। अभी तक की जांच में धमाकों में इस्तेमाल किए गए सामान का पता चला है। आईईडी बनाने के लिए अमोनियम नाइट्रेट, सल्फ्यूरिक एसिड और कुछ ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया गया।

मोबाइल बना हथियार
सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि धमाकों के लिए मोबाइल फोन को हथियार बनाया गया। मोबाइल ट्रिगर के जरिए ही हैदराबाद में दोनों धमाके किए गए। यही वजह है कि अब पुलिस दिलसुख नगर में किए गए सारे मोबाइल कॉल्स की डिटेल्स को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां धमाके से आधे घंटे पहले और आधे घंटे बाद किए गए सारे कॉल की डिटेल्स निकालने में जुटी हैं। दिलसुख नगर में इस दौरान कुल 42,379 कॉल्स किए गए। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इन्हीं कॉल्स में धमाकों का राज छिपा है।

धमाके के बाद कश्मीर से आई 8 संदिग्ध कॉल 
हैदराबाद सीरियल बम धमाके में जांच एजेंसियों को सुराग मिलने लगीं हैं। सूत्रों के मुताबिक धमाके के बाद हैदराबाद के शाहिन बाग में जम्मू कश्मीर से कॉल आई। करीब आठ कॉल आई। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बारे में ज्यादा खुलासा नहीं करना चाहती है। महाराष्ट्र के नांदेड़ और अहमद नगर में महाराष्ट्र एटीएस की टीम छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि महाराष्ट्र के नांदेड़ और अहमद नगर में छापेमारी से कुछ लीड मिल सकते हैं। लेकिन कोई ठोस लीड की बात करें तो जांच एजेंसियों का कहना है कि इस बाबत उनके पास कुछ भी ठोस नहीं है। फिलहाल एनआईए, एनएसजी और महाराष्ट्र एटीएस की टीम हैदराबाद में ब्लास्ट स्थल पर मौजूद हैं। फॉरेंसिक साक्ष्य उठाए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां जानकारी के आधार पर स्केच बना रही है।

ऑनलाइन बैंकिंग और शॉपिंग का बढ़ता बाजार


टैप, क्लिक और स्वाइप... ये तीन वह शब्द हैं, जो मौजूदा समय में शॉपिंग और फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल ने शॉपिंग और बैंकिंग को पहले से कहीं ज्यादा आसान और पहुंच वाला बना दिया है। तकनीक की बदौलत बैंक के दस्तावेजों ने कम्प्यूटर फाइल्स का रूप ले लिया है और कैश काउंटर पर बैठने वाले की जगह एटीएम मशीनों ने ले ली है। पहले बैंकों में रोजाना होने वाले आर्थिक लेनदेनों को रजिस्टर में लिखकर रखा जाता था, जिसे दिन का काम खत्म होने के बाद अपडेट किया जाता था। अब यह काम कम्यूटरीकृत हो गया है, जिसका फायदा बैंक के आम ग्राहकों को मिल रहा है।

लगभग डेढ़ दशक पहले तक बैंक की शाखाएं बैंक और ग्राहक के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी हुआ करती थीं। लेकिन अब परिदृश्य बदल चुका है। अब ग्राहकों को बैंकिंग के लिए घड़ी देखकर नहीं जाना पड़ता है। चाहे रुपए निकालने की बात हो या फिर जमा करने की। यहां तक कि फंड ट्रांसफर का काम भी बिना बैंक गए ही होने लगा है। बैंक आपके टेलीफोन, मोबाइल और कम्प्यूटर पर उपलब्ध है।

अल्टरनेटिव बैंकिंग
आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वर्षों के दौरान बैंकिंग से जुड़े उनके कई काम ऑनलाइन हो चुके हैं। जिसमें फंड ट्रांसफर, बचत खाता खोलना, चेकबुक मंगाना और डिमांड ड्राफ्ट के लिए बैंक की शाखा के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। साथ ही रोजमर्रा के बिल जिनमें बिजली, पानी, टेलीफोन और मोबाइल के बिल शामिल हैं, को भी बैंक की मदद से बिना शाखा जाए ही जमा किया जा सकता है। बैंकों ने अपनी इन सेवाओं को अल्टरनेटिव बैंकिंग का नाम दिया है। वर्तमान बैंकिंग परिदृश्य में लगभग सभी बैंकों के 40 प्रतिशत ग्राहक अल्टरनेटिव बैंकिंग का उपयोग कर रहे हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

जल्द ही अल्टरनेटिव बैंकिंग उपयोग करने वालों की संख्या 80 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। बैंक के ऐसे ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो बिना ब्रांच में गए अपनी बैंकिंग के काम पूरा कर लेते हैं। इस समय केवल 15 प्रतिशत ग्राहक ही बैंक की शाखाओं में पहुंच रहे हैं।

एटीएम सबसे पुराना और लोकप्रिय
भारतीय बैंकिंग के आधुनिकीकरण में एटीएम -ऑटोमेटेड टेलर मशीन- का रोल काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। यह अल्टरनेटिव बैंकिंग का सबसे पुराना, सफल और मौजूदा माध्यम है। एटीएम मशीनों ने भारतीय बैंकिंग की दिशा बदलने में जबरदस्त रोल निभाया है। यही वजह है कि बड़े और सरकारी बैंकों के अलावा छोटे तथा को-ऑपरेटिव बैंक भी अपनी एटीएम यूनिट स्थापित करने लगे हैं। पिछले तीन वर्षों में पूरे देश में एटीएम मशीनों की संख्या दोगुनी से ज्यादा होकर एक लाख का आंकड़ा पार कर चुकी हैं।

इनमें से 70 प्रतिशत मशीनें शहरी इलाकों में लगी हैं। बाकी मशीनें कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं। अंतरराष्ट्रीय सर्वे एजेंसी सेलेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2016 तक एटीएम मशीनों की संख्या दोगुनी हो जाएगी, जिनमें से 50 फीसदी छोटे शहरों में लगाई जाएंगी।

कैश से कहीं ज्यादा उपयोग
वर्तमान समय में एटीएम का उपयोग केवल नगद निकासी के लिए नहीं रह गया है। इसका उपयोग डिमांड ड्राफ्ट ऑर्डर, चेकबुक ऑर्डर के साथ ही फिक्स डिपॉजिट करने के लिए भी किया जा रहा है।

रिजर्व बैंक की पहल
बैंकिंग में बदलावों के लिए भारतीय रिवर्ज बैंक ने भी खासा काम किया है। कार्ड से होने वाले भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन की प्रक्रिया को सुगम बनाकर उसने इसका सीधा फायदा आम बैंक उपभोक्ताओं को पहुंचाया है। आरबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011-12 के दौरान देश में ऑनलाइन ट्रांजेक्शंस की संख्या 71 फीसदी बढ़ी है। इसी दौरान चेक से होने वाले ट्रांजेक्शंस का प्रतिशत लगातार गिरता गया। 2007-08 से 2011-12 के दौरान पेपर बेस्ड पेमेंट में 8.4 प्रतिशत की कमी देखी गई।

मोबाइल का दौर
पिछले पांच वर्षों के दौरान मोबाइल से होने वाले भुगतानों का प्रतिशत बढ़ा है। मोबाइल मनी सुविधा शुरू होने के बाद इसमें और अधिक इजाफा हुआ है। हालांकि इसके उपयोगकर्ताओं का प्रतिशत अभी काफी कम है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें बढ़ोतरी होगी। आरबीआई के कार्यकारी निदेशक जी. पद्मनाभन के मुताबिक मोबाइल बैंकिंग तकनीक का भविष्य उज्जवल है और इस दिशा में लगातार काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भारतीय अर्थव्यवस्था में केवल दो प्रतिशत लेनदेन ही इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के जरिए किया जा रहा है। अभी भी देश में ऐसे स्थानों की संख्या बहुत कम है, जहां कार्ड के जरिए भुगतान लिया जाता है।

  • देश के 10 मिलियन से ज्यादा रिटेलर्स में से केवल 0.6 प्रतिशत ही कार्ड से भुगतान स्वीकार करते हैं।

Monday, February 25, 2013

अंदर नक्सली और आतंकवादी, बाहर दुश्मन देश


आपमें से अधिकांश ने आतंकवादियों और लिट्टे के 'ह्यूमन बॉम्ब' के बारे में सुना होगा। लेकिन नक्सलियों ने पेट के अंदर बॉम्ब प्लांट कर सिक्योरिटी एजेंसीज से लेकर आम आदमी तक के होश उड़ा दिए हैं। अभी तक बारूदी सुरंगों के जरिए जवानों पर हमला करने वाले माओवादियों ने दहशत फैलाने की यह नया तरीका अपनाना शुरू किया है। ये वाकया झारखंड के लातेहार जिले में जारी माओवादी और सुरक्षा बलों के बीच एनकाउंटर के बाद सामने आया है। गौरतलब है कि अभी तक दुनिया में सिर्फ मानव बम जैसी घटनाएं भी सामने आईं थीं, जिसमें आतंकवादी अपने शरीर पर विस्फोटक बांधकर खुद को धमाके से उड़ा देता था।

सर्जरी से प्लांट किया था आईईडी
लातेहार के नक्सली हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवान बाबूलाल पटेल के पेट में नक्सलियों ने 1.5 किलोग्राम की एक आईईडी सर्जरी करके प्लांट कर दी थी। रिम्स (रांची इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) के पोस्टमार्टम हाऊस में जब डॉक्टर्स और स्टाफ ने उनकी बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए आपॅरेट किया तो सभी डर के साथ-साथ हैरान भी रह गए। डॉक्टर्स ने इसकी जानकारी सीआरपीएफ  ऑफिसर्स को दी, तब जाकर मामला खुला। गुरुवार की सुबह हजारीबाग से आई बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉयड (बीडीडीएस) ने दोपहर दो बजे के करीब आईईडी को डिफ्यूज कर दिया। लातेहार जिले के बरवाडीह के कटिया जंगल में सात जनवरी से 'ऑपरेशन एनाकोंडा' के तहत नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चल रहा है।

ऐसे हुआ खुलासा
लातेहार में तीन दिनों से 'ऑपरेशन एनाकोंडा' के तहत शहीद पांच जवानों के शवों का पोस्टमार्टम नौ जनवरी की रात में डीसी विनय कुमार चौबे के निर्देश पर किया जा रहा था। टीम में शामिल डॉ. अजीत कुमार चौधरी, डॉ.विनय कुमार, पोस्टमार्टम हाऊस का कर्मचारी मोहन मलिक, राजू मलिक, टिंकू जवानों के शव का पोस्टमार्टम कर रहे थे। टीम ने दो जवान सुदेश कुमार और चम्पालाल मालवीय का शव का पोस्टमार्टम किया। उस समय बाबूलाल पटेल का शव भी मॉर्चरी में गया। जैसे ही टीम शव का पोस्टमार्टम करने की तैयारी करने लगी, उसी समय राजू चिल्लाया, सर इसका तो पहले ही पोस्टमार्टम हो चुका है। सभी ने जाकर देखा तो बाबूलाल पटेल का पेट 15 फीट लंबा चीरा हुआ था और उसे बोरा सिलने के स्टाइल में सील दिया था। जब डॉक्टर्स ने उसे छूकर देखा तो पेट के अंदर कड़ी चीज होने का अहसास हुआ। डॉक्टर्स ने तुरंत पोस्टमार्टम रोक दिया। बाहर आकर उन्होंने इसकी जानकारी रिम्स के डायरेक्टर डॉ तुलसी महतो और सीआरपीएफ के अधिकारियों को दी गई। फिर, बताया गया कि जवान के शरीर से पहले ही छेड़छाड़ की गई है। डॉक्टर्स को यह बताया गया कि घटनास्थल से ही जवान के शव को रिम्स भेजा गया है। इसके बाद सीआरपीएफ ऑफिसर्स ने जवान के शव को बाहर रखने के लिए कहा और बम निरोधक दस्ता को बुलाया गया। बम निरोधक दस्ता ने पेट के अंदर बम होने की पुष्टि की।

एक और जवान की  सिलाई
रिम्स में आए एक जवान के शव का जब पोस्टमार्टम किया जा रहा था तो उस समय भी डॉक्टर्स ने पाया कि उसके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह डैमेज हो गया था। उसके पेट पर भी सिलाई के निशान मिले थे।

पहला केस आया सामने
भारत में इस तरह से बम लगाने का यह पहला मामला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के मामले को उन्होंने कभी हैंडल नहीं किया था और यह उनका पहला अनुभव था। हालांकि, नक्सलियों द्वारा शरीर के अंग में सीरिज में बम लगाए गए थे, ताकि प्रेशर पडऩे पर बम में धमाका हो जाए और ज्यादा से ज्यादा कैजुअलटी हो। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की तकनीक को श्रीलंका में लिट्टे द्वारा उपयोग किया जाता रहा है।

लगाया था शव के नीचे बम
पुलिस को धोखा देने के लिए और ज्यादा से ज्यादा क्षति पहुंचाने की नीयत से शहीदों के शव के नीचे बम लगा रखा था। सभी शवों के नीचे लगाए गए बम को बॉम्ब स्क्वॉयड ने डिफ्यूज किया था। पर, इनमें से कुछ जवानों के शवों का पेट ऑपरेट कर उसमें बम फिट कर दिया गया था।

घटना का बैकग्राउंड
अभियान के पहले दिन नक्सलियों ने सीआरपीएफ, एसटीएफ के जवानों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानीं शुरू कर दी। ताबड़तोड़ हमले में दस जवान शहीद हो गए और 20 जवान जख्मी हो गए थे।

डॉक्टर्स कमेंट
रिम्स के डॉ. अजीत कुमार चौधरी और लैब टेक्निशियन दयामय मुखर्जी ने बताया कि उन लोगों को पहले यह आशंका हुई कि आखिर इसका पोस्टमार्टम किसने किया है। चूंकि जिस ढंग से सिलाई की गई थी वह डॉक्टर की सिलाई नहीं लग रही थी। वह किसी पैरा मेडिकल के द्वारा सिलाई लग रही थी। फिर, शव को 15 इंच तक सिला गया था। अमूमन पेशेवर डॉक्टर किसी बॉडी को उतनी लंबाई तक नहीं सिलता। उसे बोरे की तरह सिल दिया गया था। फिर, इसकी जांच की गई कि यदि जवान का ऑपरेशन पहले ही हुआ होगा तो घाव लेकर वह 'ऑपरेशन एनाकोंडा' में भाग क्यों लेगा। इसलिए उन लोगों को शक हुआ और पोस्टमार्टम रोक दिया गया।

...तो उड़ जाता रिम्स
बीडीडीएस के अधिकारी का कहना था कि यदि सिलाई को तोड़ा जाता तो एक बड़ा ब्लास्ट भी हो सकता था। इस ब्लास्ट की चपेट में आकर रिम्स की मॉर्चरी बिल्डिंग को काफी नुकसान पहुंचता और कई लोग मारे जाते। इस तरह के बम को प्रेशर रिलीज डिवाइस बम कहा जाता है। इसमें चार-पांच लोगों के उडऩे की संभावना बनती है।