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Tuesday, April 27, 2010

तो फिर बस

दूर हो जाएं आपसे कोई गम न हो बस चाहें इतना
कुछ कमी लगे जब हम न हों
हर एक खुशी में आपकी शामिल हों
ना हो सामने तो हमारी यादें हों
हमारे आपके रिश्ते की डोर इतनी पावन हो
जिसका गवाह प्रकृति और कण-कण हो
इस दोस्ती के अनमोल रिश्ते में न कोई विघ्न हो
न विषाद की रेखा न कोई दूरी हो
हो तो बस खुशियां ही खुशियां हो
हों खूबसूरत यादें और बातें हों,
जो आए कुछ भुलाने की नौबत कभी तो
तो फिर बस हम न हों।

** कवियत्रीः सपना गुरु, पेशे से विज्ञान शोधकर्ता हैं **

तो फिर बस

दूर हो जाएं आपसे कोई गम न हो बस चाहें इतना
कुछ कमी लगे जब हम न हों
हर एक खुशी में आपकी शामिल हों
ना हो सामने तो हमारी यादें हों
हमारे आपके रिश्ते की डोर इतनी पावन हो
जिसका गवाह प्रकृति और कण-कण हो
इस दोस्ती के अनमोल रिश्ते में न कोई विघ्न हो
न विषाद की रेखा न कोई दूरी हो
हो तो बस खुशियां ही खुशियां हो
हों खूबसूरत यादें और बातें हों,
जो आए कुछ भुलाने की नौबत कभी तो
तो फिर बस हम न हों।

** कवियत्रीः सपना गुरु, पेशे से विज्ञान शोधकर्ता हैं **

खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भी

खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भी
कुछ रास्ता है सीधा सा और कुछ है आसपास जाल भी
मुकद्दर ले जा रहा है जाने कहा और किस ओर है मंजिल
धुधली हैं राहें….दूर होता है साहिल…..

काश कोई संभाले कुछ देर को ही सही
इस वक्त और दूर जाते लम्हों की कहानी..... 

दूरियां हैं साथ और कुछ मुश्किलें भी
राहों पे बिखरे शूलों की कुछ अटकलें भी
बेतहाशा भाग रहे हैं किस शमा की चाह में
अब तो चाहूं साथ इस अजनबी राह में
काश कोई आए और संभाले सही
जीवन की डोर और बीतते वक्त की कहानी.....



कवियत्रीः सपना गुरु, पेशे से विज्ञान शोधकर्ता हैं।

खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भी

खामोशियां हैं आसपास और कुछ सवाल भी
कुछ रास्ता है सीधा सा और कुछ है आसपास जाल भी
मुकद्दर ले जा रहा है जाने कहा और किस ओर है मंजिल
धुधली हैं राहें….दूर होता है साहिल…..

काश कोई संभाले कुछ देर को ही सही
इस वक्त और दूर जाते लम्हों की कहानी..... 

दूरियां हैं साथ और कुछ मुश्किलें भी
राहों पे बिखरे शूलों की कुछ अटकलें भी
बेतहाशा भाग रहे हैं किस शमा की चाह में
अब तो चाहूं साथ इस अजनबी राह में
काश कोई आए और संभाले सही
जीवन की डोर और बीतते वक्त की कहानी.....



कवियत्रीः सपना गुरु, पेशे से विज्ञान शोधकर्ता हैं।